राजकीय पॉलिटेक्निक श्रीनगर में 79 छात्र-छात्राओं की रैंडम ड्रग सैंपलिंग, जन-जागरूकता के साथ नशा मुक्त भविष्य की ओर मजबूत कदम Smart Youth Stay Drug-Free: छात्रों को दिया गया नशा जागरूकता का मजबूत ।

श्रीनगर | वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार के निर्देशन में पुलिस टीमों द्वारा संचालित “नशा मुक्त देवभूमि” अभियान के अंतर्गत युवाओं, विशेषकर छात्र-छात्राओं को नशे के दुष्प्रभावों से बचाने हेतु निरंतर प्रभावी जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। इसी क्रम में क्षेत्राधिकारी श्रीनगर अनुज कुमार के पर्यवेक्षण एवं प्रभारी निरीक्षक श्रीनगर कुलदीप सिंह के नेतृत्व में श्रीनगर पुलिस एवं स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा राजकीय पॉलिटेक्निक श्रीनगर में व्यापक स्तर पर रैंडम ड्रग सैंपलिंग एवं जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य विभाग की विशेषज्ञ मेडिकल टीम द्वारा पूर्ण गोपनीयता एवं वैज्ञानिक पद्धति के साथ लगभग 79 छात्र-छात्राओं की उनकी मर्जी से रैंडम ड्रग सैंपलिंग की गई। इस पहल का उद्देश्य केवल जांच तक सीमित न होकर युवाओं में नशे के प्रति जागरूकता, आत्मनियंत्रण और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना रहा। साथ ही इस दौरान मनोचिकित्सक डॉ. आशीष गुसाईं द्वारा छात्रों से संवाद कर समझाया गया कि वर्तमान समय में नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा, साथियों के दबाव (Peer Pressure) या मानसिक तनाव से बचने के प्रयास में होती है, जो धीरे-धीरे एक गंभीर लत का रूप ले लेती है । नशे के दुष्प्रभावों के संबंध में छात्रों को अवगत कराया गया कि यह मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर निर्णय लेने की क्षमता को कमजोर कर देता है। इसके प्रारंभिक संकेतों में पढ़ाई में रुचि कम होना, व्यवहार में बदलाव तथा आत्मविश्वास में गिरावट शामिल हैं। लंबे समय तक नशे का सेवन अवसाद, आक्रामकता एवं अन्य मानसिक विकारों को जन्म देता है, साथ ही यह व्यक्ति के पारिवारिक, सामाजिक एवं आर्थिक जीवन पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है।

युवाओं को जागरूक करते हुए बताया गया कि नशे से बचाव के लिए “ना” कहने की क्षमता विकसित करना, गलत संगति से दूर रहना तथा सकारात्मक मित्रों का चयन करना अत्यंत आवश्यक है। इसके अतिरिक्त खेल, योग, ध्यान, संगीत एवं अन्य रचनात्मक गतिविधियों को अपनाकर मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है। किसी भी प्रकार के तनाव की स्थिति में नशे का सहारा लेने के बजाय परिजनों, शिक्षकों या विशेषज्ञों से संवाद करना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति नशे की चपेट में है तो उसे छुपाने के बजाय समय पर काउंसलिंग एवं चिकित्सीय सहायता लेना जरूरी है । साथ ही छात्रों को यह भी अवगत कराया गया कि वर्तमान में सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के माध्यम से ड्रग्स की सप्लाई का नेटवर्क तेजी से फैल रहा है। ऐसे में किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन संपर्क, ऑफर या गतिविधि से सतर्क रहते हुए तुरंत पुलिस को सूचना देना आवश्यक है ।

*पुलिस टीम*
1. वरिष्ठ उपनिरीक्षक जगमोहन रमोला
2. सीआईयू टीम श्रीनगर

*चिकित्सा विभाग की टीम*
1. डॉ0 आशीष गुसाई – मनोचिकित्सक / जिला नोडल अधिकारी,
2. शिवदयाल सिंह भंडारी – लैब टेक्नीशियन, उप जिला चिकित्सालय श्रीनगर।
3. नवीन कठैत – लैब टेक्नीशियन, उप जिला चिकित्सालय श्रीनगर।
4. मनमोहन देवली – एम0 एण्ड0 ई0 ऑफिसर।

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