पतंजलि विश्वविद्यालय में आगामी 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक की आयोजित |

हरिद्वार | पतंजलि विश्वविद्यालय में आगामी 52वें अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की तैयारियों को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। सम्मेलन का आयोजन 29 से 31 अक्टूबर 2026 तक पतंजलि विश्वविद्यालय, हरिद्वार में किया जाएगा। सम्मेलन का प्रमुख विषय “योग, आयुर्वेद एवं अन्य प्राचीन चिकित्सा पद्धतियां” है । सम्मेलन में योग, आयुर्वेद, भारतीय चिकित्सा पद्धति, आध्यात्मिक आयाम, वैज्ञानिक अनुसंधान, आधुनिक स्वास्थ्य व्यवस्था, योग मनोविज्ञान तथा समेकित चिकित्सा जैसे विषयों पर विद्वानों एवं शोधार्थियों द्वारा विचार-विमर्श किया जाएगा । भारत एवं विदेशों के प्रतिष्ठित विद्वानों, विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं शोधार्थियों के लिए पंजीकरण प्रक्रिया प्रारंभ है। इच्छुक प्रतिभागी दिए गए लिंक के माध्यम से अपना पंजीकरण करा सकते हैं । उल्लेखनीय है कि अखिल भारतीय प्राच्यविद्या सम्मेलन की स्थापना वर्ष 1919 में हुई थी। लगभग एक शताब्दी से अधिक समय से यह सम्मेलन भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, संस्कृति, साहित्य, भाषाओं, इतिहास एवं प्राच्यविद्याओं के अध्ययन और अनुसंधान को समर्पित विद्वानों का महत्वपूर्ण मंच रहा है । बैठक में आगामी सम्मेलन की तैयारियों की विस्तृत समीक्षा की गई। विभिन्न समितियों द्वारा किए जा रहे कार्यों का परीक्षण करते हुए नई समितियों का गठन, कार्यों का पुनर्वितरण तथा नई जिम्मेदारियों का निर्धारण किया गया। सम्मेलन को सफलतापूर्वक संपन्न कराने के लिए नई कार्ययोजनाओं एवं रणनीतियों पर भी विचार-विमर्श किया गया । बैठक में पंजीकरण, अतिथि-सत्कार, आवास एवं भोजन व्यवस्था, परिवहन, तकनीकी प्रबंधन, शोध-पत्र एवं सत्र संचालन, प्रचार-प्रसार, मीडिया, सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा अन्य व्यवस्थाओं से संबंधित कार्यों की समीक्षा की गई। सभी समितियों के बीच बेहतर समन्वय, कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन तथा नियमित प्रगति समीक्षा पर विशेष जोर दिया गया । इस अवसर पर प्रति-कुलपति पूज्या साध्वी देवप्रिया, क्रय समिति अध्यक्षा बहन अंशुल, संप्रेषण विभाग प्रमुख बहन पारूल, वित्त अधिकारी सी.ए. ऋचा भगत, संकायाध्यक्ष प्रो. मयंक अग्रवाल, कुलसचिव, उपकुलसचिव, परीक्षा नियंत्रक, शोध अधिष्ठाता, शैक्षणिक अधिष्ठाता, विभिन्न विभागों के विभागाध्यक्ष, विश्वविद्यालय का मीडिया प्रकोष्ठ, शिक्षकगण, विद्यार्थी समन्वयक एवं कक्षा प्रतिनिधि सहित विभिन्न समितियों से जुड़े सदस्य उपस्थित रहे ।

 

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