डा. रेशमा शाह के गढ़वाली एलबम ‘पहाड़ घूमणा’ का मसूरी में लोकार्पण, अनूप जलोटा ने की है तारीफ |

मसूरी | उत्तराखंड की लोकप्रिय लोक गायिका डॉ रेशमा शाह के नए एलबम ‘पहाड़ घूमणा’ का मसूरी में लोकार्पण हुआ. रेशमा ने इस एलबम के गीत के माध्यम से पलायन का दर्द बयां किया है. लोकगायिका का कहना है अगर गांव बचेंगे तो पहाड़ बचेंगे. इसके लिए नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं.

डॉ रेशमा शाह का नया एलबम: लोक गायिका डॉ. रेशमा शाह ने अपने नए उत्तराखंडी गीत पहाड़ घूमणा को पर्यटन गीत भर नहीं, बल्कि पलायन के खिलाफ एक सामाजिक संदेश बताया है. मसूरी में गीत के संबंध में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल उत्तराखंड की प्राकृतिक सुंदरता को देश-दुनिया तक पहुंचाना नहीं, बल्कि लोगों को अपने गांव, अपनी संस्कृति और अपनी मिट्टी से दोबारा जोड़ना है.

अनूप जलोटा ने रेशमा की गायिकी की तारीफ की: डॉ. रेशमा शाह ने बताया कि इस गीत का पहला लोकार्पण मुंबई में प्रसिद्ध गजल एवं भजन गायक अनूप जलोटा के जन्मदिवस के अवसर पर उनके आवास पर किया गया था. इस दौरान बॉलीवुड की कई नामी हस्तियां मौजूद थीं. उन्होंने बताया कि अनुप जलोटा ने गीत सुनने के बाद उनकी आवाज की सराहना की और उनके साथ एक भक्ति गीत भी गाया, जिसे वह अपने लिए सम्मान और प्रेरणा मानती हैं.

रेशमा का नया एलबम ‘पहाड़ घूमणा’ है: रेशमा शाह ने कहा कि ‘पहाड़ घूमणा’ केवल एक गीत नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा से जुड़ा संदेश है. गीत के माध्यम से उन्होंने पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता,प्राकृतिक सुंदरता, स्वच्छ वातावरण, पारंपरिक गांव, खेत-खलिहान, बाग-बगीचे और स्थानीय संस्कृति को देशवासियों के सामने प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि लोग उत्तराखंड को केवल पर्यटन स्थल नहीं बल्कि अपनी विरासत के रूप में देखें.

डॉ रेशमा ने पलायन पर चिंता जताई: उन्होंने चिंता जताई कि वर्तमान समय में बड़ी संख्या में लोग अपने गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं. इससे गांव सूने होते जा रहे हैं और लोग अपनी पैतृक जमीनें बेच रहे हैं. इन जमीनों पर तेजी से कंक्रीट के जंगल का निर्माण हो रहा है, जिससे पहाड़ों का प्राकृतिक स्वरूप बदल रहा है और आपदाओं का खतरा भी बढ़ता जा रहा है.

गांव खाली होंगे तो पहचान खत्म हो जाएगी: डॉ. रेशमा शाह ने कहा, यदि गांव खाली हो जाएंगे तो हमारी संस्कृति, हमारी बोली और हमारी पहचान भी धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी. हर व्यक्ति को अपने गांव से रिश्ता बनाए रखना चाहिए. समय-समय पर गांव जाएं, अपने घर, खेत, बगीचे और जंगलों की देखभाल करें. यही हमारी असली पूंजी हैं. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पलायन रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन केवल सरकारी योजनाओं से यह संभव नहीं है. इसके लिए लोगों को भी अपनी सोच बदलनी होगी और अपनी जन्मभूमि के प्रति जिम्मेदारी निभानी होगी.

गीत लोगों को गांव से जोड़ेगा: रेशमा शाह ने विश्वास जताया कि उनका नया गीत लोगों को भावनात्मक रूप से अपने गांवों से जोड़ने का काम करेगा. उन्होंने कहा कि यदि इस गीत को सुनने के बाद कुछ लोग भी अपने गांव लौटने, अपनी पैतृक संपत्ति बचाने और पहाड़ की संस्कृति को आगे बढ़ाने का संकल्प लेते हैं, तो उनके इस प्रयास की वास्तविक सफलता होगी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *