पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग ने चलाई जागरुकता की पाठशाला: राजकीय महाविद्यालय अगस्त्यमुनि के छात्र-छात्राओं को किया गया जागरुक ।

रुद्रप्रयाग | एसपी रुद्रप्रयाग अक्षय कोंडे आज द्वारा राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय अगस्त्यमुनि (जनपद रुद्रप्रयाग) में “Stay Smart, Stay Safe: Cyber Crime Awareness Program” शीर्षक से एक साइबर सुरक्षा जागरुकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य युवाओं को बढ़ते डिजिटल अपराधों से सचेत करना और सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार के लिए प्रेरित करना था। उन्होने बताया कि आज की दुनिया में “डेटा ही नया हथियार” बन चुका है, और भारत में हर 10 सेकंड में एक साइबर अपराध होता है। इस सत्र में छात्रों को पहचान की चोरी (आईडेंटिटी थेप्ट), फिशिंग एवं ओटीपी धोखाधड़ी, फर्जी ऐप और वेबसाइट ठगी, ऑनलाइन उत्पीड़न, तथा डेटा लीक जैसे आम अपराधों की जानकारी दी गई । इस दौरान वर्ष 2025 के ट्रेंडिंग साइबर फ्रॉड्स पर विशेष प्रकाश डाला गया, जिनमें यूपीआई व क्यूआर कोड फिशिंग, फर्जी निवेश एप्स, केदारनाथ हेलीकॉप्टर बुकिंग के नाम पर होने वाली ठगी, ऑनलाइन लोन/केवाईसी फ्रॉड, और फर्जी नौकरी व इंटर्नशिप पोर्टल ठगी प्रमुख रहे। इस दौरान रुद्रप्रयाग पुलिस द्वारा किए गए वास्तविक मामलों में सफल कार्यवाहियों को भी साझा किया गया, जिनमें केदारनाथ हेलीकॉप्टर फर्जी वेबसाइट केस में 4 अभियुक्तों की गिरफ्तारी तथा फर्जी एपीके ऐप फ्रॉड में डेटा चोरी रोकने में सफलता मिली। इसी वर्ष साइबर ठगों द्वारा पुलिस के उच्चाधिकारी के नाम से साइबर ठगी करने वाले व्यक्तियों के बारे में भी बताया गया कि किस प्रकार से पुलिस के स्तर से ऐसे व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है।
फेक वीडियो, आर्टिफिसियल इंटेलिजेंस तथा ऑनलाइन छवि खराब करने सम्बन्धी विषय पर बताते हुए कहा कि आज के समय में सोशल मीडिया एक संवाद व एक दूसरे से जुड़ने का सशक्त माध्यम है, वहीं इसके दुष्प्रभाव भी सामने आये हैं। उपस्थित युवाओं को फेक वीडियो, डीपफेक, एआई के दुरुपयोग और ऑनलाइन मानहानि जैसे बढ़ते साइबर अपराधों के प्रति जागरुक किया गया।

इस अवसर पर उन्होंने एक वास्तविक केस स्टडी साझा की, जिसमें एक कॉलेज छात्रा के फेस से मिलते जुलते दिखने वाला अश्लील वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल किया गया था। पुलिस जांच में पाया गया कि वह वीडियो दो वर्ष पूर्व अन्य वेबसाइटों पर अपलोड किया गया था और पीड़िता का उससे कोई सम्बन्धित नहीं था। तकनीकी जांच जैसे रिवर्स इमेज एनालिसिस और सोर्स डेटा वेरिफिकेशन के माध्यम से यह तथ्य स्पष्ट हुआ। तत्पश्चात इस प्रकार का भ्रामक कृत्य करने वालों पर स्थानीय थाने पर अभियोग पंजीकृत होने की जानकारी देते हुए इस प्रकार के कृत्य न किये जाने के बारे में सचेत किया गया । पुलिस अधीक्षक ने कहा कि टेक्नोलॉजी एक साधन भी है और हथियार भी, इसे जिम्मेदारी से उपयोग करना हमारी जिम्मेदारी है। उन्होंने आईटी एक्ट तथा भारतीय न्याय संहिता की प्रमुख धाराओं जिसके अन्तर्गत गोपनीयता उल्लंघन, अश्लील सामग्री का प्रसारण तथा डिजिटल माध्यम से मानहानि जैसे अपराध दंडनीय हैं के बारे में बताया गया । कार्यक्रम में एआई जनरेटेड वीडियो, डीपफेक और सेक्सटॉर्शन जैसे आधुनिक साइबर अपराधों पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि अपराधी अक्सर नकली प्रोफाइल बनाकर वीडियो कॉल या मैसेजिंग के माध्यम से ब्लैकमेलिंग करते हैं । कार्यक्रम के अन्त में उपस्थित छात्र-छात्राओं से साइबर अपराध सम्बन्धी उनके डाउट्स, जिज्ञासा तथा उनके साथ साइबर ठगी के वास्तविक अनुभवों की जानकारी प्राप्त की गयी। छात्र-छात्राओं को ऐसे मामलों की तुरन्त रिपोर्ट राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नम्बर 1930 पर कॉल करने की सलाह दी गई । आयोजित हुए कार्यक्रम अवसर पर कॉलेज के प्राचार्य प्रो. कैलाश चन्द्र, थानाध्यक्ष अगस्त्यमुनि कुलदीप पन्त, पीआरओ नरेन्द्र सिंह रावत सहित कॉलेज के प्रोफेसर/प्रवक्ता तथा छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे ।

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