बुलेट चलाने का शौक बना अपराध का रास्ता: नाबालिग बालकों ने चुरा दी बुलेट मोटरसाइकिल पौड़ी पुलिस की कड़ी मेहनत से चोरी हुई मोटरसाइकिल बरामद, 03 किशोरों को लिया संरक्षण में |

पौड़ी | वादी संजय रावत, निवासी पाबो, पौड़ी द्वारा कोतवाली पौड़ी में एक शिकायती प्रार्थना पत्र दिया गया, जिसमें उनके द्वारा अंकित किया गया कि रात्रि को उनकी मोटर साइकिल (बुलेट) संख्या UK12F-1802 को किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा चोरी कर लिया गया है। प्राप्त तहरीर के आधार पर कोतवाली पौड़ी में मु0अ0सं0- 10/2026, धारा 302(2) बीएनएस बनाम अज्ञात पंजीकृत किया गया । उक्त चोरी की घटना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक पौड़ी सर्वेश पंवार द्वारा मामले के शीघ्र अनावरण हेतु प्रभारी निरीक्षक कोतवाली पौड़ी को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए । निर्गत निर्देशों के क्रम में प्रभारी निरीक्षक कोतवाली पौड़ी जयपाल सिंह नेगी के नेतृत्व में 04 पुलिस टीमों का गठन किया गया। गठित टीमों द्वारा घटनास्थल एवं आसपास के क्षेत्रों में व्यापक स्तर पर जांच-पड़ताल कर जानकारी की गई साथ ही, पौड़ी, श्रीनगर एवं निकटवर्ती क्षेत्रों में लगे लगभग 100 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का विश्लेषण किया गया। इसके अतिरिक्त, चेकिंग अभियान के दौरान भी विभिन्न क्षेत्रों में चोरी गए वाहन के संबंध में लगातार सूचनाएं एकत्रित की गईं। पुलिस टीमों द्वारा सतत प्रयास, तकनीकी साक्ष्यों के विश्लेषण एवं सघन सुरागरसी-पतारसी के परिणामस्वरूप उक्त चोरी की घटना में श्रीनगर क्षेत्र के संलिप्त 03 नाबालिग बालकों को संरक्षण में लिया गया। जानकारी करने पर उनके द्वारा बताया गया कि उन्हें बुलेट मोटर साइकिल चलाने का शौक था, जिसके चलते उन्होंने उक्त वाहन को चोरी किया था। पुलिस टीम द्वारा कार्यवाही करते हुए उनके कब्जे से मुकदमा उपरोक्त से संबंधित चोरी गई बुलेट मोटर साइकिल को भी बरामद किया गया। प्रकरण में विधिक कार्यवाही करते हुए तीनों विधि-विवादित किशोरों को माननीय किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया जा रहा है ।

*नोटः- किशोर अवस्था में उचित मार्गदर्शन एवं निगरानी का अभाव बच्चों को गलत दिशा में ले जा सकता है। अतः सभी अभिभावकों से अपील है कि वे अपने बच्चों की दिनचर्या, मित्र मंडली एवं गतिविधियों पर विशेष ध्यान रखें। बच्चों के व्यवहार में अचानक परिवर्तन, अनावश्यक खर्च, देर रात तक घर से बाहर रहना अथवा संदिग्ध गतिविधियाँ दिखाई देने पर तत्काल सतर्कता बरतें। बच्चों को नैतिक मूल्यों, कानून के महत्व एवं सामाजिक उत्तरदायित्व के प्रति जागरूक करना और सकारात्मक संवाद, अनुशासन एवं उचित मार्गदर्शन ही बच्चों को अपराध की राह से दूर रख सकता है

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