रिपोर्ट – वंश शर्मा
हरिद्वार | जनपद हरिद्वार की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) द्वारा जीआरपी उत्तराखण्ड के समस्त थाना प्रभारियों को मानव तस्करी के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
इस अवसर पर टीम निरीक्षक विरेन्द्र रमोला द्वारा उपस्थित अधिकारी एवं कर्मचारियों को मानव तस्करी की परिभाषा, प्रकार, कारणों तथा इसके विरुद्ध की जाने वाली कानूनी कार्यवाही के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। साथ ही पीड़ितों की पहचान, रेस्क्यू ऑपरेशन, पुनर्वास प्रक्रिया एवं संवेदनशील तरीके से पूछताछ करने के महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया ।
प्रशिक्षण के दौरान मानव तस्करी से संबंधित प्रमुख अधिनियमों जैसे—
▪️ भारतीय न्याय संहिता (bns) की प्रासंगिक धाराएं
▪️ अनैतिक देह व्यापार (निवारण) अधिनियम (ITPA)
▪️ पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act)
▪️ बंधुआ मजदूरी उन्मूलन अधिनियम
आदि के बारे में भी विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई।
इसके अतिरिक्त माननीय उच्चतम न्यायालय के महत्वपूर्ण निर्णय जैसे—
▪️ पिंकी बनाम राज्य सरकार, उत्तर प्रदेश के प्रकरण का भी उल्लेख किया गया, जिसमें मानव तस्करी एवं पीड़ितों के संरक्षण, पुनर्वास तथा पुलिस की जिम्मेदारियों के संबंध में महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश प्रदान किए गए हैं ।
साथ ही उच्चतम न्यायालय एवं केंद्र/राज्य सरकार द्वारा जारी नवीनतम दिशा-निर्देशों, SOP (Standard Operating Procedure) तथा रेस्क्यू एवं रिहैबिलिटेशन प्रोटोकॉल पर भी चर्चा की गई, जिससे पुलिस कर्मियों को मानव तस्करी से संबंधित मामलों में त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही करने में सहायता मिलेगी । कार्यक्रम में विभिन्न केस स्टडी एवं वास्तविक घटनाओं के उदाहरणों के माध्यम से पुलिस कर्मियों को जागरूक किया गया तथा उनसे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर चर्चा की गई। साथ ही विभिन्न एजेंसियों जैसे—NGO, चाइल्डलाइन, महिला हेल्पलाइन एवं अन्य विभागों के साथ समन्वय स्थापित करने पर भी बल दिया गया । इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जागरूकता बढ़ाना, उनकी कार्यक्षमता को सुदृढ़ करना तथा मानव तस्करी जैसे संगठित अपराध की रोकथाम हेतु उन्हें सक्षम बनाना रहा । यह प्रशिक्षण पुलिस बल को मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराध से प्रभावी रूप से निपटने, पीड़ितों को न्याय दिलाने एवं समाज में सुरक्षा की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध होगा । प्रशिक्षण के दौरान जीआरपी उत्तराखण्ड के समस्त थाना प्रभारी एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उपस्थित अधिकारी/कर्मचारीगण मौजूद रहे। अन्य सभी थानों के अधिकारी एवं कर्मचारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से प्रशिक्षण से जोड़ा गया । अंत में प्रतिभागियों के प्रश्नों का समाधान करते हुए उन्हें फील्ड में आने वाली चुनौतियों से निपटने के व्यावहारिक सुझाव भी दिए गए तथा भविष्य में इस प्रकार के प्रशिक्षण नियमित रूप से आयोजित किए जाने पर बल दिया गया ।
















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