पुलिस महानिरीक्षक कुमायूँ परिक्षेत्र  रिधिम अग्रवाल पदभार ग्रहण करने के उपरान्त पहली बार नैनीताल कार्यालय पहुँची |

कुमाऊं  | पुलिस महानिरीक्षक कुमायूँ परिक्षेत्र  रिधिम अग्रवाल पदभार ग्रहण करने के उपरान्त पहली बार नैनीताल कार्यालय पहुँची जहॉ पर सर्वप्रथम उनको गार्द द्वारा सलामी दी गयी । तत्पशात अपने कार्यालय के प्रत्येक शाखा का बारीकी से निरीक्षण किया शाखा प्रभारियों को हिदायत दी गयी कि परिक्षेत्रीय कार्यालय केवल पोस्ट ऑफिस की तरह कार्य नहीं ना करें परिक्षेत्रीय स्तर पर प्रत्येक सैल द्वारा जनपदों के कार्यों की समीक्षा करते हुए उनकी प्रगति आख्या भी ली जाये प्रत्येक कर्मचारी एक टीम भावना के तहत अपने कार्यों का निर्वहन करें | बाद निरीक्षण आईजी द्वारा कुमायूँ परिक्षेत्र के समस्त वरिष्ठ/पुलिस अधीक्षक एवं सहायक / अपर पुलिस अधीक्षकों के साथ वीडियो कांफ्रेस के माध्यम से गोष्ठी की गयी गोष्ठी में प्रमुख रुप से निम्न निर्देश निर्गत किये गये।

1- महिला अपराधों के सम्बन्ध में महिला सशक्तिकरण विभाग के साथ समन्यव स्थापित करते हुए जनपदों में स्थापित वन-स्टॉप सेंटर पर पीडिता एवं उसके परिजनों की काउंसलिंग अवश्य कारायी जाये ।

2- आधुनिक समय में सी0सी0टी0वी0 कैमरे अपराधों का खुलासा करने में मददगार रहे है अभी भी कुछ ऐसे क्षेत्र है जहाँ अभी भी सी0सी0टी0वी0 कैमरे नहीं लगे या खराब स्थिति में है सभी जनपद प्रभारियों द्वारा तीन साल का प्रस्ताव तैयार कर कोशिश की जाय कि ऐसे संवेदनशीन क्षेत्र जहाँ सी0सी0टी0वी0 स्थापित नहीं उन स्थानों का चिन्हीकरण कर ज्यादा से ज्यादा सी0सी0टी0वी0 लगाये जाये ।

3- कुमायूँ रेंज में जो थाना /चौकी अभी राजस्व क्षेत्र से पुलिस क्षेत्र में सामिल किये गये है, उन थाना /चौकी क्षेत्रान्तर्गत सीनियर अधिकारी जैसे सहायक /अपर /पुलिस अधीक्षक तथा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रात्रि विश्राम करें जिससे जनता का पुलिस के प्रति और अधिक भरोसा बढे ।

4- 41 ए द0प्र0सं0 के सम्बन्ध में जनजागरुता के माध्यम से आमजन मानस को यह अवगत कराया जाय कि इस अधिनियम के अन्तर्गत सात वर्ष से कम सजा वाले अपराधों में गिरफ्तारी नहीं होती है चूकि ऐसे अपराधों से सम्बन्धित वादियों को यह लगता है कि पुलिस उनकी मदद नहीं कर रहीं है इस सम्बन्ध में आम जनता को जागरुक होना आवश्यक है।

5- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) के प्रावधानों का पालन करने के लिए अलगे तीन साल की योजना बनायी जाये जैसे साक्ष्य संकलन फॉरंसिक राय गिरफ्तारी  जब्ती आदि ।

6- पुलिसिंग में आधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया जाये लेकिन बेसिक पुलिसिंग न छोडी जाये जैसे गश्त , पिकैट ,पैट्रोलिंग आदि जनता के बीच में पुलिस की मौजूदगी बनी रहे ।समस्त थाना प्रभारी तथा क्षेत्राधिकारी नियमित रुप से गस्त, पिकेट, पैट्रोलिंग आदि की नियमित रुप से तथा सहायक /अपर पुलिस अधीक्षक औचक रुप से चैकिंग करेंगे ।

7. प्रायः देखने में आ रहा है कि अपराध घटित होने पर उसकी सूचना सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यमों से तुरन्त प्रसारित हो जाती है, परन्तु की कार्यवाही सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर प्रसारित नहीं हो पाती है । इसके लिए जनपदों में सोशल मीडिया मॉनिटरिंग/प्रमोशन सैल को और अधिक प्रभावी किया जाये ।

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