मसूरी विन्टरलाईन कार्निवाल-2026 को भव्य आयोजन को लेकर जिला प्रशासन शुरू की तैयारियां डीएम डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में एनआईसी सभागार में बैठक, सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता एवं पर्यटकों की सुविधाओं पर विशेष फोकस ऐतिहासिक स्मारकों एवं भवनों का सौन्दर्यीकरण कर कार्निवाल कार्यक्रमों से जोड़ने के निर्देश, पर्यटकों को मसूरी एवं राज्य के इतिहास, लोक परम्परा, संस्कृति से रूबरू कराने पर जोर देहरादून : 29 अक्टूबर 2026, मसूरी विन्टरलाईन कार्निवाल-2026 को भव्य, आकर्षक एवं सुव्यवस्थित रूप से आयोजित करने तथा देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित एनआईसी सभागार में बैठक आयोजित की गई। बैठक में कार्निवाल की तैयारियों, विभिन्न व्यवस्थाओं एवं आयोजन से संबंधित गतिविधियों की समीक्षा करते हुए जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि मसूरी विन्टरलाईन कार्निवाल-2026 के आयोजन को भव्य एवं यादगार बनाने के लिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय से कार्य करते हुए व्यवस्थाओं को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूर्ण करें। उन्होंने कहा कि कार्निवाल के दौरान मसूरी में पर्यटकों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा एवं यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जाए। पर्यटकों एवं स्थानीय नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए यातायात प्रबंधन, साफ-सफाई, सौन्दर्यीकरण, सड़क व्यवस्था एवं पेयजल सहित सभी आवश्यक व्यवस्थाएं समय से सुनिश्चित की जाएं। जिलाधिकारी ने कहा कि मसूरी विन्टरलाईन कार्निवाल केवल मनोरंजन का आयोजन न होकर पर्यटन को बढ़ावा देने, स्थानीय संस्कृति एवं ऐतिहासिक विरासत को देश-विदेश तक पहुंचाने तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार एवं आय के अवसर सृजित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इस दृष्टिगत कार्निवाल की गतिविधियों को इस प्रकार नियोजित किया जाए कि पर्यटकों को आकर्षित करने के साथ ही मसूरी की विशिष्ट पहचान एवं ऐतिहासिक महत्व का भी प्रचार-प्रसार हो। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि मसूरी के ऐतिहासिक स्मारकों एवं भवनों का सौन्दर्यीकरण करते हुए ऐसे महत्वपूर्ण स्थलों को कार्निवाल की कार्यक्रम श्रृंखला से जोड़ा जाए। इन स्थानों पर आकर्षक एवं क्षेत्रीय इतिहास, परम्परा, लोककला, स्थानीय व्यंजन पर आधारित कार्यक्रम, आयोजित किए जाएं, जिससे मसूरी आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों को यहां की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक विरासत संबंधी जानकारी प्राप्त हो सके। उन्होंने कहा कि मसूरी की ऐतिहासिक पहचान को कार्निवाल की गतिविधियों के माध्यम से प्रदर्शित करने से पर्यटकों का अनुभव और अधिक समृद्ध होगा तथा शहर की विरासत को नई पहचान मिलेगी। जिलाधिकारी ने कहा कि मसूरी विन्टरलाईन कार्निवाल-2026 को और अधिक आकर्षक एवं प्रभावी बनाने के लिए देश के अन्य पर्यटन क्षेत्रों में सफलतापूर्वक आयोजित कार्निवाल एवं पर्यटन महोत्सवों का अध्ययन किया जाए। वहां की बेहतर व्यवस्थाओं, नवाचारों एवं सफल गतिविधियों को मसूरी की स्थानीय परिस्थितियों एवं विशेषताओं के अनुरूप कार्निवाल में शामिल करने की संभावनाओं पर कार्य किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को आयोजन की प्रत्येक गतिविधि में गुणवत्ता, समन्वय एवं पर्यटकों की सुविधा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने कहा कि मसूरी विन्टरलाईन कार्निवाल एक रोजगारपरक एवं पर्यटन संवर्धन से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इससे मसूरी में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा मिलने के साथ स्थानीय होटल व्यवसायियों, व्यापारियों, परिवहन सेवा प्रदाताओं, स्थानीय कलाकारों एवं अन्य संबंधित लोगों के लिए रोजगार और आय अर्जन के अवसर बढ़ते हैं। पर्यटन गतिविधियों में वृद्धि का सकारात्मक प्रभाव प्रदेश की आर्थिकी पर भी पड़ता है। इसलिए आयोजन को इस प्रकार तैयार किया जाए कि इसका लाभ स्थानीय लोगों एवं राज्य की अर्थव्यवस्था तक प्रभावी रूप से पहुंचे। उन्होंने कहा कि कार्निवाल के कार्यक्रम पर्यटकों के मनोरंजन, स्थानीय लोगों की सहभागिता, रोजगार एवं आय के अवसरों तथा मसूरी और उत्तराखण्ड के इतिहास एवं सांस्कृतिक विरासत के प्रचार-प्रसार को ध्यान में रखकर आयोजित किए जाएं। सभी विभाग निर्धारित दायित्वों का समयबद्ध निर्वहन सुनिश्चित करें, ताकि मसूरी विन्टरलाईन कार्निवाल-2026 को सफल, सुरक्षित, आकर्षक एवं पर्यटक हितैषी बनाया जा सके। बैठक में अध्यक्ष नगर पालिका परिषद मसूरी मीरा सकलानी, संयुक्त मजिस्ट्रेट मसूरी राहुल आनंद, मुख्य कोषाधिकारी नीतू भण्डारी, पुलिस अधीक्षक जया बलूनी, परियोजना निदेशक ग्राम्य विकास अभिकरण विक्रम सिंह, उप नगर आयुक्त गौरव कुमार, अध्यक्ष होटल एसोसिएशन संदीप साहनी, सचिव होटल एसोसिएशन अजय भार्गव, जिला पर्यटन विकास अधिकारी जसपाल चौहान, पुलिस क्षेत्राधिकारी जगदीश पंत, सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी रत्नाकर सिंह, नायब तहसीलदार उपेन्द्र सिंह राणा, लोक निर्माण विभाग से दीपक कुमार, पेयजल निगम से भीम निराला, आईटीबीपी से अजय प्रकाश सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे ।

देहरादून | मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरूवार को लेखक गाँव, थानों, देहरादून में आयोजित लेखक गाँव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव- 2026 के समापन समारोह में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लेखक गाँव की पत्रिका “धरती का स्वर्ग उत्तराखंड” एवं “देवभूमि का काव्य पुष्प” पुस्तिका का विमोचन किया । मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखक गाँव, समाज को दिशा देने वाले विचारों का प्रतीक है। जो वर्तमान के साथ भविष्य का निर्माण कर रहा है।उन्होंने कहा लेखक गांव, प्रदेश में स्थानीय प्रतिभाओं को नया मंच देने के साथ साहित्यिक मानचित्र पर राज्य को नई पहचान दे रहा है। उन्होंने भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि स्व. अटल जी शब्दों के साधक थे, उनकी लेखनी में पर्वतों सी दृढ़ता और गंगा सी गहराई थी। उन्होंने कहा अटल जी ने हमें सिखाया कि शब्द भी राष्ट्र निर्माण के शस्त्र बन सकते हैं । मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड हमेशा से रचनात्मकता, ज्ञान और संस्कृति का केंद्र रही है। देवभूमि से निकले विचारों ने हमेशा समाज को प्रेरित और आगे बढ़ाने का काम किया है।उत्तराखंड में ऋषियों ने अनेक महान ग्रंथों की रचना की। उन्होंने कहा देवभूमि के प्राकृतिक सौंदर्य ने हमेशा लेखकों, कवियों और विचारकों को प्रेरित करने का काम किया है। साहित्य ही हमारे मूल्यों और विचारों को दर्शाता है ।

मुख्यमंत्री ने कहा लेखकों, कवियों और रचनाकारों ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान भी लेखकों, साहित्यकारों ने अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा लेखक और रचनाकार शब्दों के निर्माता के साथ समाज के चिंतक, मार्गदर्शक भी होते हैं । मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार, साहित्य और संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर काम कर रही है। राज्य में उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान, साहित्य भूषण और लाइफ टाइम अचीवमेंट जैसे पुरस्कारों के माध्यम से प्रदेश के उत्कृष्ट साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है। वहीं हिंदी सहित विभिन्न स्थानीय भाषाओं में ग्रंथ प्रकाशन के लिए साहित्यकारों को अनुदान भी दिया जा रहा है। राज्य सरकार उत्तराखंड को साहित्यिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र रूप में विकसित करने के लिए भी कार्य कर रही है । मुख्यमंत्री ने कहा राज्य में दो साहित्य ग्रामों की स्थापना की जा रही है, जहाँ साहित्यकारों के लिए आवासीय सुविधा, आधुनिक पुस्तकालय संगोष्ठी कक्ष और अध्ययन स्थल जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इस पहल से साहित्यकारों के लिए राज्य में अनुकूल वातावरण प्रदान किया जाएगा। राज्य सरकार, उत्तराखंड की साहित्यिक विरासत को और अधिक समृद्ध बनाने के लिए संकल्पित है।

मुख्यमंत्री ने कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक और साहित्यिक धरोहर के पुनर्जागरण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री से प्रेरणा लेकर राज्य सरकार भी उत्तराखंड के बिखरे हुए साहित्य को संकलित, संरक्षित और पुनर्स्थापित करने के लिए भी ठोस और प्रभावी कदम उठा रही है। उन्होंने कहा हम विकास के साथ अपनी विरासत को बचाने का भी काम कर रहे हैं । केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड में ऐतिहासिक विकास कार्य हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार के प्रयासों से सीमांत क्षेत्रों में रिवर्स माइग्रेशन निरंतर बढ़ रहा है। आदि कैलाश, नीति-माणा क्षेत्र में पर्यटकों की संख्या में भी ऐतिहासिक वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा पहले जहां पहुंचने में 5 दिन लगते थे, आज वहां का सफ़र महज कुछ घंटों में पूरा हो रहा है । इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, हेमवती नंदन बहुगुणा विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. प्रकाश सिंह, प्रोफेसर प्रदीप भारद्वाज, प्रो. राकेश सुंदरियाल, डॉ. विदुषी निशंक एवं अन्य लोग मौजूद रहे ।

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