
रिपोर्ट – वंश शर्मा
हरिद्वार | भोजनमाताएं प्रगतिशील भोजनमाता संगठन यूनियन के बैनर तले इकठ्ठा होकर जिला शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन दिया। विकास भवन रोशनाबाद हरिद्वार में पहले सभा की गई उसके बाद जुलूस निकालकर जिला शिक्षा अधिकारी के यहां प्रदर्शन कर हड़ताल का ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का संचालन यूनियन की उपाध्यक्ष रजनी ने किया । प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की पूनम ने कहा कि हम भोजनमाताएं 20-21 सालों से सरकारी, अर्ध सरकारी विद्यालयों में भोजन बनाने का काम कर रही हैं। परंतु, अत्यंत खेद की बात है कि इतने वर्ष कार्य करने के बाद भी हमारी स्थिति आज भी अत्यंत असुरक्षित, अस्थिर एवं उपेक्षित बनी हुई है। मुख्यमंत्री के सामने हम अपनी समस्याएं एवं मांग अलग-अलग वक्त पर रखते रहे हैं। मगर अफसोस है कि हमारी मांगों को लगातार अनसुना किया जा रहा है । प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की रचना ने कहा कि हम 4-4 कर्मचारियों (माली, सफाई कर्मचारी, चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और भोजनमाता तो हम है ही) के बराबर काम कर रहीं हैं। इतने पर भी कभी बच्चे कम होने के नाम पर, तो कभी भोजनमाताओं के बच्चे स्कूल में नहीं पढ़ने के फर्जी तर्क पर, तो कभी स्कूलों के विलयीकरण के नाम पर हमें नौकरी से निकाला जा रहा है या नौकरी से निकालने की धमकी दी जा रही है। हमारा मानसिक उत्पीड़न किया जा रहा है ।
सभा में इंकलाबी मजदूर केंद्र के उपाध्यक्ष पंकज ने कहा कि भोजनमाताओं का वेतन पिछले 4 सालों से 3000 पर ही अटका हुआ है। यह राज्य सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम वेतन के एक तिहाई से भी कम है। इस बीच राज्य सरकार ने 25 प्रतिशत न्यूनतम वेतन बढ़ाया हैं मगर भोजनमाताओं की स्थिति को सरकार ने कतई संज्ञान में नहीं लिया है। उत्तराखंड सरकार ने भोजन “माता” शब्द दिया और “माता” शब्द के “सम्मान” के नाम पर उत्तराखंड सरकार भोजनमाताओं का शोषण उत्पीड़न कर रही है। ऐसा फर्जी सम्मान नहीं चाहिए। एक इंसान के बतौर भोजनमाताओं को उत्तराखंड में कर्मचारी का दर्जा मिलना चाहिए । क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के नासिर जी ने कहा कि अभी हाल ही में उत्तराखंड सरकार ने उत्तराखंड राज्य में समान नागरिक संहिता लागू की है। एक तरफ सरकार कहती है कि ‘एक देश, एक राज्य में दो कानून नहीं चलेंगे’ मगर वहीं दूसरी ओर सरकार न्यूनतम वेतनमान में इतना भारी फर्क कर रही है। इतनी भयावह बढ़ती महंगाई के बीच हमारा अस्तित्व खतरे में है। एक ओर 25 हजार भोजनमाताओं की हालत इतनी बुरी है। वहीं दूसरी ओर हम गरीबों के प्रतिनिधियों (सांसद, विधायकों) के वेतन भत्ते बढ़ते जा रहे है। 2018 से अब तक उत्तराखंड सरकार ने विधायको के पेंशन, वेतन भत्तों में दो से तीन बार बढ़ोतरी कर दी है। वेतन भत्ता बढ़ाकर 2 लाख 90 हजार से 4 लाख कर दिया है। पेंशन 40 हजार से बढ़ाकर 60 हजार कर दी है। एक ही देश में इतनी भारी असमानता और अन्याय क्यों है ।
प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की कोषाध्यक्ष नीता ने कहा कि हम भोजनमाताएं लंबे समय से अपने न्यूनतम वेतन और स्थाई नौकरी के लिए संघर्ष कर रही हैं। सरकार हमारी मांगों को लगातार अनसुना कर रही है। हमने अपनी समस्याओं के समाधान के लिए 2-3 जून को देहरादून में दो दिवसीय धरना प्रदर्शन किया, उत्तराखंड सरकार के सामने अपनी समस्याओं को रखा। लेकिन सरकार ने हमे मौखिक आश्वाशन देकर अभी तक हमारी समस्याओं का कोई समाधान नहीं किया। इसलिए अब हम मजबूर होकर 2 फरवरी 2026 को हड़ताल (खाना बनाना बंद) करेंगे। जिसकी पूरी जिम्मेदारी उत्तराखण्ड सरकार और शासन प्रशासन की होगी । कार्यक्रम में प्रगतिशील भोजनमाता संगठन की पूनम, अनीता, रजनी, ममता, रचना, माया, ओमवती, रीना, नीता सहित दर्जनों भोजनमाताएं शामिल रही। इसके अलावा इंकलाबी मजदूर केंद्र से पंकज, जयप्रकाश, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन से नासिर अहमद देव भूमि श्रमिक संगठन से दिनेश शामिल रहे ।
















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